August 12, 2022

Gaurav Gatha(Hindi)-20-Katha Sri Satyanarayan Ji

 गौरव गाथा(हिंदी)-20-कथा श्री सत्यनारायण जी की















सत्य को नारायण के रूप में पूजना ही सत्यनारायण की पूजा है. इसका दूसरा अर्थ यह है कि संसार में एकमात्र नारायण ही सत्य हैं, बाकी सब माया है. सत्य में ही सारा जगत समाया हुआ है. सत्य के सहारे ही शेष भगवान पृथ्वी को धारण करते हैं | श्रीसत्यनारायण व्रत का वर्णन देवर्षि‍ नारद जी के पूछने पर स्वयं भगवान विष्णु ने अपने मुख से किया है |

सत्यनारायण व्रत कथा स्कंद पुराणके रेवाखंडसे संकलित की गई है।सत्यनारायण व्रत कथा का पूरा सन्दर्भ यह है कि पुराकालमें शौनकादिऋषि नैमिषारण्य स्थित महर्षि सूत के आश्रम पर पहुंचे। ऋषिगण महर्षि सूत से प्रश्न करते हैं कि लौकिक कष्टमुक्ति, सांसारिक सुख समृद्धि एवं पारलौकिक लक्ष्य की सिद्धि के लिए सरल उपाय क्या है ? महर्षि सूत शौनकादिऋषियों को बताते हैं कि ऐसा ही प्रश्न नारद जी ने भगवान विष्णु से किया था। भगवान विष्णु ने नारद जी को बताया कि लौकिक क्लेशमुक्ति, सांसारिक सुखसमृद्धि एवं पारलौकिक लक्ष्य सिद्धि के लिए एक ही राजमार्ग है, वह है सत्यनारायण व्रत। सत्यनारायण का अर्थ है सत्याचरण, सत्याग्रह, सत्यनिष्ठा। संसार में सुखसमृद्धि की प्राप्ति सत्याचरणद्वारा ही संभव है। सत्य ही ईश्वर है। सत्याचरणका अर्थ है ईश्वराराधन, भगवत्पूजा। 

गौरव गाथा द्वारा प्रस्तुत इस चित्रकथा में इसी कथा का वर्णन किया गया है |



  • गौरव गाथा
  • शीर्षक          : कथा श्री सत्यनारायण जी की
  • अंक              : 20
  • कुल पृष्ठ        : 36
  • भाषा             : हिंदी
  • प्रकाशक       : गौरव गाथा पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
  • प्रकाशन वर्ष  : ....
इसे पढ़ने के लिए : 55 mb

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