August 26, 2022

Gaurav Gatha(Hindi)-03-Netaji Subhashchandra Bose

गौरव गाथा(हिंदी) संख्या-03-नेताजी सुभाषचन्द्र बोस
















नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का नाम भारत का बच्चा-बच्चा जानता है| नेताजी स्व्तन्त्रता संग्राम के अमर सेनानियों में से एक है | नेताजी का जन्म 23 January 1897 को कटक में श्री जानकी दास जी के घर में हुआ | नेताजी बचपन से ही मेधावी छात्र थे | माता प्रभावती और स्वामी विवेकानन्द जी का प्रभाव इन पर बहुत पड़ा, कॉलेज में अंग्रेज प्रोफेसरों के गलत व्यवहार को ये सहन नहीं कर सके और एक अंग्रेज को पीट डाला और नेताजी को 2 साल के लिए कॉलेज से निकल दिया फिर भी 1919 मैं बी ए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की फिर नेताजी महात्मा गांधी के आंदोलन में शामिल हो गये और इन्हें 6 महीने का कारावास हुआ | 1938 में नेताजी हरिपुरा राष्ट्रीय महासभा (कांग्रेस) के प्रधान चुने गये| 29 जनवरी 1941 को नेताजी चुपके से देश से बाहर चले गये और हिटलर और मुसोलिनी जैसे नेताओं से मिले| फिर नेताजी ने बैंकाक में आजाद हिन्द फ़ौज की स्थापना की और वंहा रहने वाले हिन्दुस्तानियों ने उनकी तन-मन-धन से सहायता की| आजाद हिन्द सेना देश को आजाद करने के लिए भारत की ओर चल पड़ी, अंग्रेज भी आजाद हिन्द सेना से हार मानने लगे|
नेताजी कहते थे “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने के साथ ही सारा संसार कांप उठा, आजाद हिन्द फ़ौज को जापान से मिलने वाली सहायता नहीं मिल सकी| जिसके कारण नेताजी की योजना अधूरी रह गयी और आजाद हिन्द फ़ौज के काफी सैनिक बन्दी बना लिए गये |नेताजी जिस विमान में गये थे, उसका आज तक पता नहीं लगा I ऐसा कहते हैं कि विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गयी| जो भी हो आज भी हम भारतवासियों के मन में नेताजी हमेशा जिन्दा रहेंगे और मन में सदा उनके लिए सम्मान रहेगा|

  • गौरव गाथा
  • शीर्षक          : नेताजी सुभाषचन्द्र बोस
  • अंक              : 03
  • कुल पृष्ठ        : 36
  • भाषा            : हिंदी
  • प्रकाशक      : गौरव गाथा पब्लिकेशन, नई दिल्ली 
  • प्रकाशन वर्ष : अक्टूबर 1980
पढ़ें : 47 mb

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